Tuesday, May 5, 2020

MUSIC CLASSES

मेरे इस ब्लॉग्गिंग पेज मै आपका हार्दिक स्वागत करता हु | मैं एक स्टूडेंट हु और मुझे संगीत से बहुत प्रेम हैं | अगर आप भी मेरी तरह एक संगीत प्रेमी है तो  जुड़े रहिये मेरे इस ब्लॉग के साथ | मै  आपको संगीत सीखने में हर तरह से सहायता करूँगा | 




संगीत सभी के जीवन में महान भूमिका निभाता है। यह हमें खाली समय में व्यस्त रखता है और हमारे जीवन को शान्त पूर्ण बनाता है।

 
सुव्यवस्थित ध्वनि, जो रस की सृष्टि से उत्पन्न होती है, वह संगीत कहलाती है। संगीत के मोहन-सुर की मादकता का जीव जगत पर जो प्रभाव पड़ता है, वह किसी से छिपा नहीं है। संगीत हमारे जीवन में आन्तरिक और आवश्यक भूमिका निभाता है। संगीत विभिन्न प्रकार का होता है, जिनका हम अपनी आवश्यकता और जरूरत के अनुसार आनंद ले सकते हैं | 

तो सभी संगीतकारो  ने शास्त्रीय संगीत का अच्छे से अध्यन किया तभी वह अपने मुकामो एक पहुंचे है | 


मै आपको भारतीय शास्रीय संगीत यानी (INDIAN CLASSICAL MUSIC) सीखने में सहायता करूँगा | मै बताना चाहूंगा की मै आपकी कैसे सहायता कर सकता हु | मै आपको बताऊंगा की आप अपने संगीत के पहले हफ्ते में क्या करे | संगीत के पहले हफ्ते में आपको क्या करना है वो तो मै बताऊंगा परन्तु उससे पहले आपको कुछ चीज़े गूगल प्ले स्टोर (GOOGLE PLAY  STORE)  से कुछ  ऍप्लिकेशन्स (APPS) डाउनलोड करने पड़ेंगे 

(१) तानपुरा ड्रोइड

(२) कोई भी एक हारमोनियम एप्लीकेशन डाउनलोड कर लीजिये | 
      

 यह ऍप्लिकेशन्स आपके लिए फायदे मंद रहेगा ताकि आप सही ढंग से रेयाज़ कर सके | सही रेयाज़ के लिए यह आवश्यक है की आपको स्वरों की सही  पहचान है  | अगले ब्लॉग से मै आपको ब्लॉग में ही वीडियो बना के  भेजूंगा ताकि  जुड़े रहे  

आज के इस ब्लॉग में यह देखते है की संगीत असल में है क्या इसकी परिभाषा हम कैसे कर सकते है | संगीत एक ऐसा माध्यम है जो मनुष्य को सांसारिक चिंता से मुक्त करके अलौकिक सुख की प्राप्ति करने में सक्षम है | 

संगीत की परिभाषा कुछ  इस प्रकार है, संगीत वह ललिता कला है जिसमे स्वर और लय(BEAT) के द्वारा मनुष्य अपने भावो को प्रकट करता हैं | 

संगीत के दो प्रकार है - (१) शास्त्रीय संगीत - CLASSICAL MUSIC

                               (२) भाव  संगीत - LIGHT MUSIC 


        नाहं वसामि वैकुण्ठे योगिनां हृदये न च |

मद्भक्ता यत्र गायन्ति तत्र तिष्ठामि नारद ||

अर्थात विष्णु जी कहते है की --- हे नारद ! न मई वैकुण्ठ में निवास करता हु और न ही योगियों के हृदयो में , मेरे भक्त जहा मेरा गुणगान जकरते हैं मै  वहा ही निवास करता हु | 

 

इस प्रकार जगत पालक भगवान् शंकर गीत से खुश होते है , श्री कृष्णा बंसी की वास् में , ब्रह्मा जी सामवेद के गति के आसक्त है तथा देवी सरस्वती माँ वीणा के आसक्त में है |  

आगे की ब्लोग्स में हम संगीत के आगे की बातें करेंगे 

धन्यवाद ||        

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